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Friday, 1 November 2013

Chapter 2 Questions

Just finished writting the second chapter (प्रशन) of Inner Circle , here is a gist
Bhagvad-gita
भग्वद गीता,दरअसल एक कहानी है, यह कहानी किसी राजा ,महाराजा या अवतार की नहीं परन्तु मानव जाती की है यह कहानी हमारी है ,आपकी है ,मेरी है.। 
आप कह सकते है की आप अपनी कहानी जानते है,पर क्या आप अपनी कहानी जानते हैं ?  तो बताइए कौन है आप ? क्या है आपके जीवन का उद्देश्य ?
उपनिषद ,उपनिषद  स्वयं को जानने और पहचानने की एक प्रक्रिया है,क्या आप जानते है की आपके  भीतर एक और व्यक्ति छिपा हुआ है जो आपको  दिखाई नहीं देता ? पर वो हर वक़्त, हर पल खुद को अभिव्यक्त करने के लिए लड़ रहा है ,वो सारे  बन्धनों को तोड़ने के लिए लड़ रहा है, वो शांति के लिए लड़ रहा है , वो आनंद की प्राप्ति के लिए लड़ रहा है।
 क्यूँ एक पुत्र या पुत्री कभी पिता के खिलाफ, कभी परिवार के खिलाफ,कभी समाज के खिलाफ  विद्रोह करता है ? क्या है जो उनसे ये विद्रोह कराता  है ? क्यूँ है असंतोष? क्यूँ है विद्रोह?. वो सुखी होना चहाता है ,पर क्या उसने सुख को पा लिया ? क्यूँ आदमी समुन्द्र की गहराइयों को ,सुरज और चाँद की ऊँचाइयों को मापना चहाता है ?,तो क्यूँ वो पर्वत के शिखर को जितना चहाता है ? क्यूँ वो संसार की सारी  सीमाओ को तोड़ देना चहाता है ? क्या वो जानता है की वो असिमित है? क्यूँ वो मृत्यु पर विजय प्राप्त करना चहाता है ? क्या वह जानता है की वह अमर है ?

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INNER CIRCLE:PATH TO PEACE


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